Sunday, September 27, 2009

प्यार का राज


किसी ने मुझसे पूछा
खुदा
ने ये प्यार को बनाया
जब
किस्मत में बूँद न थी पानी की
तो
उसने सागर में क्यूँ बिठाया
दिल
दे के उसमें दर्द-ऐ-दिल क्यों जगाया
अगर
पोछने न थे अश्क हमारे
तो फिर प्यार का एहसास क्यूँ कराया
अगर प्यार बना ही दिया
तो
फ़िर हमपे ही क्यों आजमाया
तो
सुनो .......
अहसास
बिन प्यार के ये जिन्दगी नही होती
दिलके टूटे बिना मौसकी नही होती
गर खुदा ने प्यार बनाया ना होता
हमपे आजमाया ना होता
तो फरक हम क्या कर पाते
रुसवाई
और बेवफाई में
सोचो इस प्यार के बिना
क्या कुछ भी हमने पाया होता
रही
बात रोने और रुलाने की
तो
सुनो.......
तुम्हारे
दर्दे -ऐ -दिल से खुदा को कभी मजा नही आया
वो
तो तुम जैसे लोगो को दिल दे के ही पछताया
दिल
हर किसी को दे बैठते हो
पहली
नजर के तकरार में
जवानी
के सुमार में
पैसो
के झंकार में
और
भूल जाते हो
इतनी जल्दबाजी वाजिब नही
दिल देना ही हैं गर
तो थोड़ा रुको
देखो परखो
क्या वो तुम्हे भी चाहता हैं जितना तुम
फ़िर करो प्यार
तब खुदा की कभी ज़रूरत न होगी
अश्क
पोछने के लिए
तब
न ही कोई दिल टूटेंगे
बेवफाई
के दिवार से....
फ़िर
तुम ही कहती फिरोगी
खुदा ने अगर ये प्यार न बनाया होता
हम रोते चिल्लाते हमपे कोई साया न होता