Friday, October 2, 2009

प्यार को ब्यापार मत बनाओ तुम


इश्क आज एक नुमाइश हैं

हर किसी की एक ही फरमाइश हैं

घर दीवारों में छुपी मुहब्बत

आज राहों पे आ गई

कल तलक दुर थी लैला

आज मजनु के बाहों में आ गई

दिल किसको दीया ये बाते आम हो गई

हर चौराहे पे मिले राँझा

हीर सरेआम हो गई

इश्क महोब्बत आज बाते हैं फितुर की

सब दिल्लगी करते हैं दिल लगाने से

वो बिन मिले हमसे बदनाम हो गई

फुल को उंकार उन्होंने बना डाला

जीत को हार उन्होंने बना डाला

प्यार रिश्ता हैं भावनाओ का

उसको आज ब्यापार उन्होंने बना डाला

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