Monday, August 2, 2010

संकल्प

ले आओ एक कच्ची लकड़ी
चल पत्थर निशां बनाते हैं
उठ जाग मन विश्वास भर
चछु से दरीया बहाते हैं

मन नईया कर्तब्यो से बांधू

हिम्मत का पतवार चलाते हैं

सागर के सीने पे डोलू

एक नया तस्वीर बनाते हैं
ले आओ एक कच्ची लकड़ी
चल पत्थर निशां बनाते हैं

देखो अम्बर नीचे झुक सा गया

नदियों का बहना रुक सा गया

मन में दृढ संकल्प लिया तो

सूरज का चलना रुक सा गया

ले आओ एक कच्ची लकड़ी
चल पत्थर निशां बनाते हैं

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