काली बदरी तो आई हरजाई
पिया का संदेशा न लाई
मेरे अंगना में..
वो मेरे अंगना में आ के इतराई
पिया का संदेशा न लाई
कई सावन ने ली आंगराई
पिया का संदेशा न लाई
भोर दोपहर वो टूक टूक ताके
हर बटोही से पूछ पूछ शरमाई
कुकुहरे ने भी कुंक लगाई
पर पिया का संदेशा न लाईकाली बदरी तो आई हरजाई
पर पिया का संदेशा न लाई
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