Sunday, August 1, 2010

सावन गीत


काली बदरी तो आई हरजाई

पिया का संदेशा न लाई

मेरे अंगना में..

वो मेरे अंगना में आ के इतराई

पिया का संदेशा न लाई

कई सावन ने ली आंगराई

पिया का संदेशा न लाई

भोर दोपहर वो टूक टूक ताके

हर बटोही से पूछ पूछ शरमाई

कुकुहरे ने भी कुंक लगाई

पर पिया का संदेशा न लाई

काली बदरी तो आई हरजाई

पर पिया का संदेशा न लाई

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