Monday, August 10, 2009

Me & Megha


When I talked with megha ……
चल फ़िर से साथ चलते हैं मेघा

वक्त न बदल सका जमाना तो क्या

रास्ता फ़िर से बदलते हैं मेघा

तेरी जुल्फे काली नही हैं अब तो क्या

चल प्यार का रंग मलते हैं मेघा

चल फ़िर से साथ चलते हैं मेघा

वो शाम तुझे क्या याद हैं मेघा

जब तु सुर्ख आँचल में लिपटी

बिजली से मांग भरती थी

कभी कड़कती कभी फड़कती

निर्झर बूंदे बरसती थी

आजकल तु क्यो उदास हैं मेघा

आज फ़िर हम तेरे पास हैं मेघा

तेरी चाल क्यो धीमी हैं

तेरे लबो की सुर्खी क्यो जब्त हैं

मेघा (cloud) replied………

क्या बताऊ ओ मेरे हमसफ़र

जब तुम मुझको छोड़ गए

बुरी नजर पड़ी “प्रदुषण” की

बनाया जाल मुझे फासने का

हिमशिखरों को पिघलाया

मुझको बहुत खूब डराया

फ़िर क्या करती मैं ओ दिलवर

डर के मरे अपना रास्ता बदलवाया

आज भी मेरी जुल्फे काली हैं

आज भी मेरे होठ सुर्ख हैं

अब तुम आ गए हो

चलो फ़िर से बरसते हैं

एक बार फ़िर से

प्यार का रंग मलते हैं

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