
हम मदिरालय निशदिन जाते थे
हम जाम से जाम टकराते थे
आंशुओ के निशब्द प्रवाह को
हम मदिरा संग पी जाते थे
एक दिन मदिरालय के सुनी डगर पे
वो मिली अचानक मुग्ध हवा सी
थोडी सरमायी थोडी लहरायी
दिल को कुछ अहसास हुआ
आँखों में जो देखा उसके
नशे मदिरा का आभास हुआपास बुलाया उसने मुझको
न जाने क्या बात हुई
वो आँखों से छलकाती गई
हम होठो से पीते ही गए
हम जाम से जाम टकराते रहे
हर जाम पे होश खोते ही गए
हम भूल गए मदिरालय को
पर नही भूले मदिरालय जाना
वो रहती थी उस सुनी डगर पे
जिसपे था मदिरालय जाना
मदिरालय में वो आंनद कहा
जो मिला मुझे मदिरालय डगर पे
मदिरालय एक बंद कुँआ हैं
मदिरालय डगर एक बहती धारा
हम मदिरालय निशदिन जाते हैं
पर बीच डगर रुक जाते हैं
अब प्याले की क्या फ़िक्र हमें
वो अँखियों से छलकाते हैं
हम होठो से पी जाते हैं
हम मदिरालय निशदिन जाते हैं
पर बीच डगर रुक जाते हैं
classy chhaps...maja aaya....
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