Friday, October 2, 2009

प्यार को ब्यापार मत बनाओ तुम


इश्क आज एक नुमाइश हैं

हर किसी की एक ही फरमाइश हैं

घर दीवारों में छुपी मुहब्बत

आज राहों पे आ गई

कल तलक दुर थी लैला

आज मजनु के बाहों में आ गई

दिल किसको दीया ये बाते आम हो गई

हर चौराहे पे मिले राँझा

हीर सरेआम हो गई

इश्क महोब्बत आज बाते हैं फितुर की

सब दिल्लगी करते हैं दिल लगाने से

वो बिन मिले हमसे बदनाम हो गई

फुल को उंकार उन्होंने बना डाला

जीत को हार उन्होंने बना डाला

प्यार रिश्ता हैं भावनाओ का

उसको आज ब्यापार उन्होंने बना डाला

Sunday, September 27, 2009

प्यार का राज


किसी ने मुझसे पूछा
खुदा
ने ये प्यार को बनाया
जब
किस्मत में बूँद थी पानी की
तो
उसने सागर में क्यूँ बिठाया
दिल
दे के उसमें दर्द--दिल क्यों जगाया
अगर
पोछने थे अश्क हमारे
तो फिर प्यार का एहसास क्यूँ कराया
अगर प्यार बना ही दिया
तो
फ़िर हमपे ही क्यों आजमाया
तो
सुनो .......
अहसास
बिन प्यार के ये जिन्दगी नही होती
दिलके टूटे बिना मौसकी नही होती
गर खुदा ने प्यार बनाया ना होता
हमपे आजमाया ना होता
तो फरक हम क्या कर पाते
रुसवाई
और बेवफाई में
सोचो इस प्यार के बिना
क्या कुछ भी हमने पाया होता
रही
बात रोने और रुलाने की
तो
सुनो.......
तुम्हारे
दर्दे - -दिल से खुदा को कभी मजा नही आया
वो
तो तुम जैसे लोगो को दिल दे के ही पछताया
दिल
हर किसी को दे बैठते हो
पहली
नजर के तकरार में
जवानी
के सुमार में
पैसो
के झंकार में
और
भूल जाते हो
इतनी जल्दबाजी वाजिब नही
दिल देना ही हैं गर
तो थोड़ा रुको
देखो परखो
क्या वो तुम्हे भी चाहता हैं जितना तुम
फ़िर करो प्यार
तब खुदा की कभी ज़रूरत होगी
अश्क
पोछने के लिए
तब
ही कोई दिल टूटेंगे
बेवफाई
के दिवार से....
फ़िर
तुम ही कहती फिरोगी
खुदा ने अगर ये प्यार बनाया होता
हम रोते चिल्लाते हमपे कोई साया होता

Monday, August 31, 2009

सावन में होली



आओ खेले होली सखिया संग

आओ खेले होली

प्यार का रंग पिचकारी मारे

गालो पे गुलाल सवारे

मल मल रंग लगाओ सखिया संग

आओ खेले होली..

देखो देखो बदरवा आया

होली का संदेश वो लाया

झम झमा झम लगा बरसने

किसान भी लगे फरकने

उठ चले बैलो को संग लगा के

विश्वास का नया रंग लगा के

धरती भी लगी बहकने

चिडियों के संग लगी चहकने

आओ खेले होली सखिया संग

आओ खेले होली

घर किसान भी होली खेले

बच्चे भी बरजोरी खेले

अम्मा भी हरसाए सखिया संग

आओ खेले होली सखिया संग

आओ खेले होली

किसान खेले खेतो में होली

बच्चो की बगिया में टोली

अम्मा घर आँगन सवारे

सखिया पहने हरी चोली

की आओ खेले होली

रंग का कोई काम नही हैं

प्यार का कोई नाम नही हैं

प्यार को भर भर उछालो सखिया संग

आओ खेले होली

Monday, August 10, 2009

Me & Megha


When I talked with megha ……
चल फ़िर से साथ चलते हैं मेघा

वक्त न बदल सका जमाना तो क्या

रास्ता फ़िर से बदलते हैं मेघा

तेरी जुल्फे काली नही हैं अब तो क्या

चल प्यार का रंग मलते हैं मेघा

चल फ़िर से साथ चलते हैं मेघा

वो शाम तुझे क्या याद हैं मेघा

जब तु सुर्ख आँचल में लिपटी

बिजली से मांग भरती थी

कभी कड़कती कभी फड़कती

निर्झर बूंदे बरसती थी

आजकल तु क्यो उदास हैं मेघा

आज फ़िर हम तेरे पास हैं मेघा

तेरी चाल क्यो धीमी हैं

तेरे लबो की सुर्खी क्यो जब्त हैं

मेघा (cloud) replied………

क्या बताऊ ओ मेरे हमसफ़र

जब तुम मुझको छोड़ गए

बुरी नजर पड़ी “प्रदुषण” की

बनाया जाल मुझे फासने का

हिमशिखरों को पिघलाया

मुझको बहुत खूब डराया

फ़िर क्या करती मैं ओ दिलवर

डर के मरे अपना रास्ता बदलवाया

आज भी मेरी जुल्फे काली हैं

आज भी मेरे होठ सुर्ख हैं

अब तुम आ गए हो

चलो फ़िर से बरसते हैं

एक बार फ़िर से

प्यार का रंग मलते हैं


प्यार का रंग बरसा दे बदरिया -2

ओ सावन की मतवाली बदरिया -2

मत कर इतनी ठिठोली पिया संग

प्यार का रंग बिखेरे बदरिया

बहक गए गर मोरे पिया तो

गिर गिर कौन संभाले पिया को

प्यार का रंग बिखेरे पिया संग

प्यार का रंग बरसा दे बदरिया


आँखों में काजल की रेखा

चले इतराए पिया ने देखा

होठो में लाली सूरज की

कानो में बाली चंदा की

मांग सजाये बिजली बदरिया


ओ सावन की मतवाली बदरिया

रिमझिम प्यार बरसा दे बदरिया


अंग पिया के रंग लगा के

मत कर इतनी ठिठोली बदरिया

प्यार का रंग बरसा दे बदरिया

प्यार का रंग बरसा दे

पिया तोहरे बिन आठो महीनावा

काटे हैं यादो के सहारे

अब आए पिया जो सावन माहे

करवा न इतना गुजारिस बदरिया

प्यार का रंग बरसा दे बदरिया

प्यार का रंग बरसा दे